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MP में शिक्षा का बड़ा बदलाव! 2026-27 से 4500 सरकारी स्कूलों में शुरू होंगी प्री-प्राइमरी कक्षाएं, जाने पूरी नई व्यवस्था

MP में 2026-27 से 4500 सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू होंगी। जानें आयु सीमा, प्रवेश नियम, विद्या प्रवेश पाठ्यक्रम और नई व्यवस्था।
MP Government Schools Pre Primary Classes 2026
भोपाल। मध्य प्रदेश की स्कूल शिक्षा विभाग में सत्र 2026-27 से एक बड़ा परिवर्तन होने जा रहा है। राज्य सरकार ने फैसला किया है कि प्रदेश के 4500 सरकारी स्कूलों में प्री-प्रायमरी कक्षाएं संचालित की जायेंगी। यह है कदम नई शिक्षा नीति 2020 के तहत उठाया गया है। जिसका उद्देश्य छोटे-छोटे बच्चों को पहली कक्षा से पूर्व बेहतर शैक्षणिक आधार देना है।

अब सरकारी स्कूलों में भी बच्चे सीधे पहली कक्षा से नहीं नर्सरी से ही पढ़ाई शुरू कर सकेंगे जिससे प्राइवेट स्कूलों और सरकारी स्कूलों के बीच शुरुआती दूरी कम होने की उम्मीद है।

क्या है नई योजना?

अभी तक लगभग 2000 से अधिक सरकारी स्कूलों में प्री-प्रायमरी कक्षाएं संचालित हो रही है। अभी इस संख्या को बढ़ाकर 4500 तक किया जाएगा।

सरकार का लक्ष्य है कि 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को औपचारिक स्कूल वातावरण से परिचित कराया जाए ताकि वे कक्षा 1 में प्रवेश के समय मानसिक और शैक्षणिक रूप से तैयार होकर मजबूत हो सके।

आयु सीमा क्या होगी?

राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा तय की गई आयु सीमा इस प्रकार है:
  • नर्सरी: 3 से 4.5 वर्ष
  • केजी-1: 4 से 5.5 वर्ष
  • केजी-2: 5 से 6.5 वर्ष
  • कक्षा-1: 6 से 7.5 वर्ष

महत्त्वपूर्ण:

  • नर्सरी केजी-1 और केजी-2 के लिए आयु की गणना 31 जुलाई के आधार पर होगी।
  • पहली कक्षा के लिए आयु का निर्धारण 30 सितंबर को आधार मानकर ही किया जाएगा।

अभिभावकों को प्रवेश से पहले जन्म तिथि अवश्य जांच लेनी चाहिए।

कैसी होंगी नई प्री-प्राइमरी कक्षाएं?

सभी सरकारी स्कूलों में अब छोटे बच्चों के लिए अलग माहौल तैयार किया जाएगा। पारंपरिक कक्षाओं की जगह बच्चों के अनुकूल वातावरण होगा।

  • रंगीन और आकर्षक दीवारें
  • बच्चों के आकार एक फर्नीचर
  • शैक्षणिक खिलौने
  • स्मार्ट LED TV
  • लर्निंग कॉर्नर

उद्देश्य है कि बच्चे स्कूल को बोझ नहीं, आनंद की जगह समझें।

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'विद्या प्रवेश' से होगी पढ़ाई

प्री-प्राइमरी कक्षाओं में किताबों का बोझ नहीं होगा बल्कि पढ़ाई खेल खेल होगी।

'विद्या प्रवेश' पाठ्यक्रम के तहत बच्चों को सिखाया जाएगा:

  • भाषा का शुरुआती ज्ञान
  • संख्यात्मक ज्ञान
  • सामाजिक व्यवहार
  • समूह में कार्य करने की आदत

कक्षाओं में पेंटिंग, कविता, कहानी सुनाना, मिट्टी के खिलौने बनाना और अन्य रचनात्मक गतिविधियों को शामिल करना।

शिक्षकों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए एक विशेष कौशल की आवश्यकता होती है। इसे ध्यान में रखते हुऎ प्राथमिक शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

जरूरत पड़ने पर अतिथि शिक्षकों को भी नियुक्त किया जा सकता है, ताकि हर बच्चे पर व्यक्तिगत ध्यान दिया जा सके।

क्यों जरूरी था यह फैसला?

अभी तक सरकारी स्कूलों में सीधे कक्षा 1 में प्रवेश दिया जाता था जबकि प्राइवेट स्कूलों में बच्चे पहले नर्सरी और केजी की पढ़ाई कर लेते थे।

इस कारण सरकारी स्कूलों में बच्चे शुरुआत में पिछड़ जाते थे, जिससे उनका बेसिक ज्ञान कमजोर रह जाता था।

नई व्यवस्था से:

  • सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बीच अंतर कम होगा
  • बच्चों की बुनियाद मजबूत होगी
  • ड्रॉपआउट दर घटेगी
  • नामांकन बढ़ेगा
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क्या होगा इसका असर?

विशेषज्ञों का मनाना है कि यह कदम आने वाले वर्षों में सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को सुधारने में बेहतर मदद करेेगा। शुरुआती शिक्षा मजबूत होने से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और आगे की पढ़ाई आसान होगी।

निष्कर्ष

सत्र 2026-27 से शुरू होने वाली यह पहल मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। यदि इसे प्रभावी तरीके से लागु किया गया तो सरकारी स्कूलों की तकदीर बदल सकती हैं।

अभिभावकों के लिए यह जरूरी है कि वे नई आयु सीमा और प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी समय रहते प्राप्त करें।

About the author

Nishant Kumar
Nishant Kumar is a digital news editor at MP News Media. He covers Madhya Pradesh news including weather updates, education, government alerts, and public interest stories.

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