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| बैतूल के बल्हेगांव में पेयजल संकट को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं ग्रामीण महिलाएं |
"हमें लाड़ली बहना योजना के पैसे नहीं चाहिए, हमें पीने के लिए साफ पानी चाहिए।"
दरअसल यह मामला बैतूल जिले के बल्हेगांव (विकासखंड प्रभातपट्टन) का है जहां करीब 2000 लोगों से अधिक की आबादी आज भी पीने के पानी के लिए जूझ रही है।
1 लीटर पानी के लिए लाइन
ग्रामीण महिलाओं के मुताबिक गांव में मिलने वाला पानी बहुत ही गंदा और बदबूदार है।
हैंड पंप से निकलने वाला पानी भी पीने लायक नहीं है फिर भी मजबूरी में हमें भी गंदा मटमैला पानी पीना पड़ रहा है।
महिलाओं का कहना है कि一
- एक 1 लीटर पानी के लिए बहुत लंबी लाइन लगानी पड़ती है
- कई परिवारों में पेट दर्द, उल्टी दस्त जैसी गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं
- बच्चों और बुजुर्गों की हालत ज्यादा खराब हो रही है
कलेक्ट्रेट पहुंची महिलाएं
पानी की समस्या से परेशान गांव की महिलाऐं मंगलवार को बैतूल जिले की कलेक्ट्रेट ऑफिस पहुंची और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।
उन्होंने साफ कहा一
"सरकार हमे हर माह ₹1200- 1500 रूपये दे रही, लेकिन हमें जब पीने का साफ पानी ही नहीं मिल पा रहा तो पैसों का हम क्या करेंगे?"
इंदौर के बाद बैतूल में भी पेयजल संकट
इंदौर संभाग की हालिया पेयजल त्रासदी के बाद अभी बैतूल जिले से भी यह खबर सामने आई है कि प्रदेश में जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा है कि一
- गंदे और दूषित पानी से लोग बीमार हो रहे हैं
- सरकार को तुरंत सभी जल स्रोतों की जांच करानी चाहिए
- जब तक साफ पानी न मिले, जनता को अपने हक के लिए आवाज उठानी चाहिए
सरकार से है सीधी मांग
गांव वालों और नेताओं की मांग है कि一
- गांव में जल्द से जल्द स्वछ पेयजल की व्यवस्था की जाए
- हैंड पंप और अन्य पेयजल स्रोतों की गुणवत्ता की जांच की जाए
- सीवेज और गंदे पानी की मिलावट पर सख्ती हो
MP News Media का सवाल
MP News Media मानता है कि一
सरकार द्वारा चलाई जा रही सभी सरकारी योजनाएं भी जरूरी हैं लेकिन पानी जैसी बुनियादी जरूरत अगर पूरी नहीं हो पा रही है, तो यह सिस्टम पर बड़ा सवाल है।
क्या सरकार समय रहते कदम उठाएगी, या गांव को यूं ही पानी के लिए तरसना पड़ेगा?
