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| जबलपुर स्थित बरगी बांध में सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता |
जबलपुर। मध्य प्रदेश राज्य के जबलपुर जिले में स्थित बरगी बांध (रानी अवंतीबाई सागर परियोजना) को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता सामने आई है। इस बांध के अंदरूनी हिस्से में लंबे समय से हो रहे पानी के रिसाव को लेकर केंद्रिय स्तर की एजेंसीओ ने इसे संभावित खतरे का संकेत बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो यह स्थिति बहुत बड़ी समस्या का रूप ले सकती है।
कई वर्षों से बना है रिसाव का दबाब, अब तक नहीं हुआ स्थाई समाधान
जानकारी के अनुसार, बांध की स्पिलवे गैलरी क्षेत्र में वर्ष 2018 से लगातर पानी का रिसाब देखा जा रहा है। हैरानी की बात ये है की इतनी वर्षों बाद भी इसका कोई तकनीकी सामाधान अभी तक लागू नहीं हो सका। एक्सपर्ट्स का कहना है कि, लंबे समय तक इस तरह का रिसाव बने रहना बांध की संरचनात्मक मजबूती को कमजोर कर सकता है।
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निगरानी और रखरखाव व्यवस्था पर उठे सवाल
संयुक्त निरीक्षण टीम ने भी इस बांध की निगरानी प्रणाली को अपर्याप्त बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, रिसाव कितना खतरनाक हो सकता है इसे मापने के लिए कोई भी जरूरी आधुनिक उपकरण की उपलब्धि नहीं है। साथ ही बांध के कुछ संवेदनशील हिस्सों में लोगों की आवाजाही भी सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं मानी गई है।
खतरे को हल्के में लेने का आरोप
सर्वे टीम का कहना है कि, बरगी बांध को अभी तक जिस श्रेणी में रखा गया है वो असल हालात को नहीं दिखाती इतनी लंबी समय से चल रही तकनीकी समस्या को नजरअंदाज करना भविष्य में भारी पड़ सकता है।
लाखों लोगों से जुड़ा मामला
बरगी बांध सिर्फ एक बांध नहीं है। इससे सिंचाई, पीने का पानी और बिजली उत्पादन जुड़ा है। अगर यहां कोई बड़ी दिक्कत आती है तो इसका असर आसपास के इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों तक पड़ सकता है और भारी नुकसान हो सकता है।
क्या कह रहे अधिकारी?
मध्य प्रदेश की नर्मदा घाटी परियोजना को लेकर अधिकारियों का कहना है की केंद्रिय टीम द्वारा बताई गई कमियों की जांच की जा रही है रिसाव के कारणों को समझने की बाद जरूरी मरम्मत और सुधार का कार्य जल्दी ही किया जाएगा।
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MP News Media की राय
MP News Media का मानना है कि, बरगी बांध से जुड़ा यह मामला आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा है ऐसी मामालों में देर करना ठीक नहीं है समय पर कार्यवाही और बेहतर निगरानी ही भविष्य के खतरे को टाल सकती है ताकि बांध के आसपास के इलाकों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
