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MP में बदली परीक्षा प्रणाली: अब 9वीं-11वीं में भी साल में दो बार वार्षिक परीक्षा, छात्रों को मिलेगा ‘डबल चांस’

मध्यप्रदेश में 9वीं और 11वीं कक्षा की परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव। अब साल में दो बार वार्षिक परीक्षा होगी, फेल छात्रों को मिलेगा दूसरा मौका।
मध्यप्रदेश में 9वीं और 11वीं कक्षा के लिए दो बार वार्षिक परीक्षा प्रणाली लागू
अब 9वीं और 11वीं के छात्रों को साल में दो बार परीक्षा का मौका मिलेगा।
भोपाल। मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग की व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब 10वीं और 12वीं की तरह ही 9वीं और 11वीं कक्षा के विद्यार्थीयों को भी साल में दो बार वर्षिक परीक्षा देने का मौका मिलेगा। लोक शिक्षण संचानालय (DPI) ने इस सम्बन्ध में आधिकारिक दिशा निर्देश जारी किए है।

इस नई व्यवस्था के तहत अब पूरक परीक्षा की जगह "द्वितीय वार्षिक परीक्षा" आयोजित की जायेगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थीयों को असफल होने की स्थिति में एक और अवसर देना और परिणाम सुधार का विकल्प उपलब्ध कराना है।

कब होंगी परीक्षाएं?

शिक्षा विभाग के अनुसार:
  • पहली वार्षिक परीक्षा 23 फरवरी से शुरू होगी
  • द्वितीय वार्षिक परीक्षा मार्च या अप्रैल में आयोजित की जाएगी
  • इसका विस्तृत टाइम टेबल जल्द जारी किया जाएगा
इस फैसले का सीधा असर प्रदेश के लगभग 20 लाख छात्रों पर पड़ेगा।

किन छात्रों को मिलेगा फायदा?

नई परीक्षा प्रणाली के तहत:
  • जो छात्रा मुख्य परीक्षा में फेल हो जाते है
  • जो किसी कारण से परीक्षा नहीं दे पाते
  • जो छात्र अंक सुधारना चाहते है
  • प्रायोगिक विषयों में केवल अनुत्तीर्ण भाग वाले विद्यार्थ
सभी को इस द्वितीय वार्षिक परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा।

हालांकि, इसके लिए निर्धारित शुल्क के साथ आवेदन करना अनिवार्य होगा। परीक्षा के दौरान विषय बदलने की अनुमति नहीं दी जायेगी।

क्यों किया गया बदलाव?

शिक्षा विभाग का मानना है कि:
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  • छात्रों पर "फेल" होने का दबाव कम होगा
  • रिजल्ट सुधार का मौका मिलेगा
  • पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी
अधिकारियों के अनुसार, यह व्यवस्था पहले 10वीं और 12वीं में लागू थी अब इसे 9वीं और 11वीं में भी लागू किया जा रहा है।

क्या होगा बड़ा बदलाव?

पहले व्यवस्था यह थी कि:
  • मुख्य परीक्षा के बाद फेल होने पर पूरक परीक्षा होती थी
अब नई प्रणाली में:
  • वर्ष में दो बार पूर्ण वार्षिक परीक्षा सत्र होंगे
  • छात्र अपना परिणाम बेहतर कर सकेंगे

शिक्षा विभाग का क्या कहना है?

DPI के अधिकारियों के मुताबिक यह निर्णय विद्यार्थीयों को दुसरा अवसर देने की सोच के साथ लिया गया है इससे विशेष रूप से उन छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी जो किसी कारणवश पहली बार परीक्षा में फेल हो गए या परीक्षा नहीं दे पाए थे।

निष्कर्ष

मध्य प्रदेश में लागू की जा रही है "डबल चांस एग्जाम सिस्टम" छात्रों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। इससे असफलता का दबाव कम होगा और बेहतर प्रदर्शन का अवसर मिलेगा।

अगर सही तरीके से लागू हुआ तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

About the author

Nishant Kumar
Nishant Kumar is a digital news editor at MP News Media. He covers Madhya Pradesh news including weather updates, education, government alerts, and public interest stories.

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